पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण पर विचार (Women Reservation in Panchayat Elections)

Women Reservation in Panchayat Elections

कोलकाता, 6 अगस्त 2025 – पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण (Women Reservation in Panchayat Elections) लागू करने की मांग की है, जो हरियाणा द्वारा निर्धारित उदाहरण पर आधारित है। 2 अगस्त 2025 को लिखे गए एक पत्र में, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संबोधित किया गया, महासचिव और पूर्व विधायक अली इमरान रमज़ ने इस मुद्दे को लागू करने की मांग की। इस मांग का समर्थन पश्चिम बंगाल इंडियन नेशनल कांग्रेस (माइनॉरिटी विभाग) के उपाध्यक्ष नौशाद आलम ने भी किया है। यह मांग ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और पंचायती राज में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाई गई है। हरियाणा ने हाल ही में यह कदम उठाया, जिससे 14,000 से अधिक पंचायत सीटों पर महिलाओं को लाभ हुआ। पश्चिम बंगाल, जहां 2023 के पंचायत चुनावों में महिलाओं की भागीदारी 34% थी, इस नीति से ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा और स्थानीय शासन को मजबूत करेगा।

महिलाओं के सशक्तिकरण में यह कदम (Women Reservation in Panchayat Elections) कैसे मददगार होगा

50% आरक्षण (Women Reservation in Panchayat Elections) महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगा, जो लंबे समय से पुरुषों के वर्चस्व वाली रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां महिलाएं परिवार और समुदाय की रीढ़ हैं, उनकी राजनीतिक भागीदारी शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। उदाहरण के लिए, हरियाणा में आरक्षण लागू होने के बाद, महिलाओं ने स्वच्छ पानी और सैनिटेशन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी, जो ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है। पश्चिम बंगाल में भी, यह नीति महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान दिलाने में मदद कर सकती है।

समाज पर प्रभाव

इस मांग (Women Reservation in Panchayat Elections) के लागू होने से समाज में गहरे बदलाव की संभावना है। सबसे पहले, यह लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने में सहायक होगा, जहां महिलाओं को केवल घरेलू भूमिकाओं तक सीमित माना जाता है। दूसरा, युवा लड़कियों को प्रेरणा मिलेगी, जो भविष्य में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। तीसरा, पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाएगी, क्योंकि वे सामुदायिक मुद्दों जैसे बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता फैला सकती हैं।

चुनौतियाँ और समाधान

हालांकि, इस नीति (Women Reservation in Panchayat Elections) को लागू करने में चुनौतियाँ भी हैं, जैसे कि महिलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण की कमी। इसके लिए राज्य सरकार को जागरूकता अभियान और नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए। इसके अलावा, पुरुष प्रधान मानसिकता के खिलाफ सामाजिक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए समुदाय आधारित पहल आवश्यक हैं।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में 50% आरक्षण (Women Reservation in Panchayat Elections) की मांग न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण का एक कदम है, बल्कि एक समावेशी समाज की ओर बढ़ने का मार्ग भी है। यह नीति लागू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, और महिलाएं विकास की प्रक्रिया में बराबर की भागीदार बनेंगी। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को उठाकर एक साहसिक कदम उठाया है, और अब यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह इस बदलाव को साकार करे।

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