मूसलधार बारिश से तबाही
जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर तबाही मचा दी है। मशहूर तीर्थस्थल Vaishno Devi के मार्ग पर मंगलवार दोपहर भूस्खलन होने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना अर्धकुंवारी के पास इंडरप्रस्थ भोजनालय के निकट हुई, जहां भारी बारिश के कारण पहाड़ी से मलबा गिर गया। Vaishno Devi यात्रा को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है, और हजारों यात्री फंसे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन मौसम की खराबी चुनौती बनी हुई है।
मौसम और आईएमडी की चेतावनी
यह घटना ऐसे समय में हुई जब पूरे जम्मू क्षेत्र में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पहले ही जम्मू, आरएस पुरा, सांबा और आसपास के इलाकों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की थी। रीासी, रामबन और अन्य जिलों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई। उदाहरण के लिए, उदयपुर एयर फोर्स स्टेशन पर 12 घंटों में 540 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। इस मौसम की वजह से नदियां उफान पर हैं, और चिनाब नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है। तवी नदी का जलस्तर भी बढ़ा, हालांकि अब इसमें कमी आ रही है।
Vaishno Devi यात्रा पर प्रभाव
Vaishno Devi मंदिर, जो कटरा से 12 किलोमीटर की ट्रेक पर स्थित है, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। घटना दोपहर करीब 3 बजे की है, जब यात्री मंदिर की ओर जा रहे थे। भूस्खलन में फंसे लोगों में ज्यादातर तीर्थयात्री शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 30 शव बरामद हो चुके हैं, लेकिन मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि कई लोग अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सा दल तैनात हैं।
मदद अभियान

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात की और स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और जल्द ही जम्मू पहुंचने की योजना बना रहे हैं, हालांकि जम्मू एयरपोर्ट बंद होने से देरी हो रही है। फोन और डेटा कनेक्टिविटी बहाल करने के प्रयास तेज हैं। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं। अब तक 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, और राहत शिविरों में सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं। सेना ने अर्धकुंवारी, कटरा-ठकरा कोट रोड और जौरियन में तीन राहत कॉलम तैनात किए हैं। सीआरपीएफ भी अर्धकुंवारी गुफा मंदिर के पास बचाव कार्य कर रही है।
इस घटना ने Vaishno Devi यात्रा पर गहरा असर डाला है। हिमकोटी मार्ग पहले ही भारी बारिश के कारण बंद कर दिया गया था, और पुराना ट्रैक भी सुरक्षा कारणों से बंद है। रात के समय यात्रा पर रोक लगा दी गई है। कई ट्रेनें रद्द होने से यात्री घर वापस नहीं लौट पा रहे हैं। अधिकारियों ने सलाह दी है कि मौसम सुधरने तक यात्रा की योजना न बनाएं।
पिछले हादसे
यह पहली बार नहीं है जब Vaishno Devi क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा आई हो। इसी महीने 17 अगस्त को कठुआ जिले में बादल फटने से 7 लोग मारे गए और 11 घायल हुए। 14 अगस्त को किश्तवाड़ में मचैल माता यात्रा के दौरान बादल फटने से 55 लोगों की मौत हुई। किश्तवाड़ के मार्गी इलाके में बाढ़ ने 10 घर और एक पुल बहा दिया, हालांकि वहां कोई हताहत नहीं हुआ। इन घटनाओं से साफ है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून की तीव्रता बढ़ रही है, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है।
राहत कार्यों में स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका सराहनीय है। केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ कर्मियों और राहत सामग्री के साथ सी130 विमान जम्मू भेजा है। चिनूक और एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर स्टैंडबाय पर हैं। बिजली, पानी और मोबाइल सेवाओं को बहाल करने पर जोर है। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने स्थिति पर अपडेट जारी करने का वादा किया है।
क्या समझना ज़रूरी है?
यह घटना हमें सतर्क रहने की याद दिलाती है। Vaishno Devi जैसे पवित्र स्थलों पर यात्रा से पहले मौसम की जांच जरूरी है। सरकार को बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।
FAQ
1. Vaishno Devi यात्रा कब तक स्थगित रहेगी?
यात्रा मौसम सुधरने तक स्थगित है। अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें।
2. घटना में कितने लोग घायल हुए?
आधिकारिक आंकड़ों में कई घायल बताए गए हैं, लेकिन सटीक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।
3. बचाव के लिए कौन-कौन सी एजेंसियां काम कर रही हैं?
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस और सीआरपीएफ सक्रिय हैं।
4. क्या Vaishno Devi क्षेत्र में ऐसी घटनाएं आम हैं?
हां, मॉनसून में बारिश और भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं।
अधिक जानकारी के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
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