भारत में त्योहारों की धूम हमेशा से ही संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है, और Ganesh Chaturthi इनमें से एक ऐसा पर्व है जो भक्ति, उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। आज, 27 अगस्त 2025 को पूरे देश में Ganesh Chaturthi की धूम मची हुई है, जहां लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यह त्योहार न केवल विघ्नों को दूर करने वाले गणपति की जयंती मनाता है, बल्कि नई शुरुआतों, बुद्धि और समृद्धि का भी संदेश देता है। आइए जानते हैं Ganesh Chaturthi के बारे में सब कुछ – इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर आधुनिक उत्सव तक।
Ganesh Chaturthi का इतिहास: प्राचीन जड़ों से स्वतंत्रता संग्राम तक
Ganesh Chaturthi की जड़ें प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलती हैं, जहां भगवान गणेश को देवी पार्वती द्वारा सृजित किए गए बालक के रूप में वर्णित किया गया है। पुराणों के अनुसार, गणेश का जन्म भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। हालांकि, इस त्योहार का सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाने का इतिहास मराठा शासक शिवाजी महाराज (1630-1680) से जुड़ा है, जिन्होंने इसे राष्ट्रवादी भावना जगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
19वीं शताब्दी में, स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में Ganesh Chaturthi को एक बड़े सार्वजनिक उत्सव में बदल दिया। तिलक ने इसे ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकता का माध्यम बनाया, जहां लोग एक साथ इकट्ठा होकर राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन करते थे। इससे पहले, यह मुख्य रूप से घरेलू पूजा तक सीमित था। आज, यह त्योहार मुंबई, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में भव्य रूप से मनाया जाता है, जहां विशाल मंडपों में गणेश की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं।
Ganesh Chaturthi का महत्व: बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक
Ganesh Chaturthi का महत्व भगवान गणेश के गुणों से जुड़ा है। वे विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और नई शुरुआतों के प्रतीक हैं। त्योहार 10 दिनों तक चलता है, जो भाद्रपद मास की चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक समाप्त होता है। इस दौरान, श्रद्धालु गणेश को मोदक, लड्डू और फलों का भोग लगाते हैं, जो उनकी पसंदीदा मिठाइयां मानी जाती हैं।
यह पर्व सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देता है, जहां समुदाय एक साथ आकर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से, हाल के वर्षों में पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का उपयोग बढ़ा है, जो मिट्टी से बनी होती हैं और जल प्रदूषण को कम करती हैं। 2025 में, Ganesh Chaturthi की तिथि 27 अगस्त है, और मध्याह्न पूजा मुहूर्त 11:05 बजे से 1:40 बजे तक है।
पूजा विधि और परंपराएं: 16 चरणों वाली शोडशोपचार पूजा

Ganesh Chaturthi की पूजा में मुख्य रूप से चार रस्में शामिल हैं: प्राण प्रतिष्ठा (मूर्ति में प्राण फूंकना), शोडशोपचार (16 चरणों वाली पूजा), उत्तर पूजा और गणपति विसर्जन। घरों में, लोग सुबह उठकर स्नान करते हैं, फिर मूर्ति स्थापना करते हैं। पूजा में धूप, दीप, फूल, चंदन और मोदक का उपयोग होता है। व्रत रखने वाले फलाहार करते हैं और शाम को आरती गाते हैं।
सार्वजनिक उत्सवों में, डांडिया, नृत्य और भजन-कीर्तन होते हैं। अंतिम दिन, विसर्जन जुलूस निकाला जाता है, जहां “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारे गूंजते हैं। महाराष्ट्र में, लालबागचा राजा जैसी प्रसिद्ध मूर्तियां लाखों दर्शनार्थियों को आकर्षित करती हैं।
भारत भर में उत्सव: मुंबई से गोवा तक की धूम
Ganesh Chaturthi का सबसे भव्य उत्सव महाराष्ट्र में होता है, लेकिन यह पूरे भारत में मनाया जाता है। मुंबई में पांडालों में विशाल मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जबकि हैदराबाद में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग ऊंची मूर्तियां देखी जाती हैं। गोवा और कर्नाटक में पारंपरिक नृत्य और संगीत का आयोजन होता है। उत्तर भारत में, दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में घरेलू पूजा अधिक प्रचलित है।
आधुनिक समय में, ऑनलाइन पूजा और वर्चुअल दर्शन ने त्योहार को वैश्विक बनाया है। अमेरिका और ब्रिटेन में प्रवासी भारतीय भी इसे धूमधाम से मनाते हैं।
निष्कर्ष: एकता और भक्ति का संदेश
Ganesh Chaturthi न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरण जागरूकता का भी प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि विघ्नों को दूर कर नई शुरुआत की जा सकती है। यदि आप अधिक जानना चाहते हैं, तो विकिपीडिया पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। और अन्य ख़बरें पाने के लिए Tathya Times के साथ जुड़े रहें।
FAQ: Ganesh Chaturthi से जुड़े सामान्य प्रश्न
- Ganesh Chaturthi कब मनाई जाती है?
यह भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। 2025 में यह 27 अगस्त को है। - Ganesh Chaturthi का मुख्य महत्व क्या है?
यह भगवान गणेश की जयंती है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। यह नई शुरुआतों का प्रतीक है। - पूजा में क्या-क्या सामग्री लगती है?
मोदक, फल, फूल, धूप-दीप और चंदन मुख्य हैं। शोडशोपचार पूजा में 16 चरण शामिल होते हैं। - विसर्जन क्यों किया जाता है?
विसर्जन मूर्ति को जल में विसर्जित करने की रस्म है, जो जीवन चक्र का प्रतीक है और अगले वर्ष गणेश के आगमन की कामना करता है। - क्या पर्यावरण-अनुकूल Ganesh Chaturthi मनाना संभव है?
हां, मिट्टी की मूर्तियां और जैविक रंगों का उपयोग कर प्रदूषण कम किया जा सकता है।

















