Children’s Day 2025: कल्पना कीजिए, एक ऐसा संसार जहां हर बच्चा न केवल खेल-कूद का आनंद लेता हो, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के पूर्ण अधिकारों से वंचित न रहे। आज, Children’s Day के इस पावन अवसर पर, हम न केवल पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्म जयंती मना रहे हैं, बल्कि उन लाखों बच्चों के भविष्य को निखारने का संकल्प भी ले रहे हैं जो भारत का कल हैं। “For Every Child, Every Right” – 2025 का यह थीम हमें याद दिलाता है कि Children’s Day केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक क्रांति का प्रतीक है। इस लेख में हम गहराई से जानेंगे Children’s Day के संदेशों की शक्ति के बारे में, जो न केवल प्रेरणा देते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
Children’s Day का ऐतिहासिक महत्व: नेहरू जी की विरासत
भारत में Children’s Day 14 नवंबर को मनाया जाता है, जो पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन पर आधारित है। नेहरू जी को ‘चाचा नेहरू’ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वे बच्चों से असीम स्नेह रखते थे। 1964 में उनके निधन के बाद, 1967 से यह तिथि आधिकारिक रूप से Children’s Day के रूप में घोषित की गई। यह दिन न केवल नेहरू जी की याद में मनाया जाता है, बल्कि बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और कल्याण पर जोर देने के लिए भी। वैश्विक स्तर पर World Children’s Day 20 नवंबर को मनाया जाता है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा बाल अधिकारों की घोषणा की याद में है। लेकिन भारत में यह तिथि विशेष है, क्योंकि यह नेहरू जी के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है: “आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे।”
नेहरू जी का मानना था कि राष्ट्र का भविष्य बच्चों के हाथों में है। उन्होंने कहा था, “बच्चे बगीचे के कोमल कली की तरह हैं, जिन्हें सावधानी और प्रेम से पोषित करना चाहिए।” यह संदेश आज भी प्रासंगिक है, जब हम देखते हैं कि भारत में 43.66 करोड़ बच्चे 18 वर्ष से कम आयु के हैं। UNICEF के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा किशोर आबादी वाला देश है, जहां 25.3 करोड़ युवा 10 से 19 वर्ष की आयु के बीच हैं। ये आंकड़े हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि Children’s Day का संदेश कितना महत्वपूर्ण है – यह केवल शुभकामनाएं नहीं, बल्कि कार्रवाई का आह्वान है।
2025 का थीम: “For Every Child, Every Right” – एक नई उम्मीद
इस वर्ष Children’s Day का थीम “For Every Child, Every Right” है, जो UNICEF और भारतीय सरकार के सहयोग से चुना गया है। यह थीम बाल अधिकार संधि (CRC) की 35वीं वर्षगांठ पर आधारित है, जो 1989 में अपनाई गई थी। भारत ने 1992 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत बच्चों को जीवित रहने, विकास करने, संरक्षित होने और भाग लेने का अधिकार मिला। लेकिन हकीकत में चुनौतियां बरकरार हैं। WHO और UNICEF के संयुक्त अनुमान के अनुसार, 2024 में वैश्विक स्तर पर 1.50 करोड़ बच्चे स्टंटिंग (कुपोषण से प्रभावित) से पीड़ित थे, जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा है।
भारत ने 1990 से 2023 तक पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 78% की कमी हासिल की है, जो दक्षिण एशिया (73.2%) और वैश्विक औसत (60.6%) से बेहतर है। फिर भी, प्रतिवर्ष 25 मिलियन बच्चों का जन्म भारत में होता है, जो विश्व के कुल जन्मों का लगभग एक-पांचवां हिस्सा है। 2050 तक भारत में 35 करोड़ बच्चे होंगे, जो वैश्विक बाल आबादी का 15% होगा। ऐसे में, Children’s Day का संदेश इन आंकड़ों को बदलने की प्रेरणा देता है। यह हमें याद दिलाता है कि हर संदेश, हर पोस्ट, हर शुभकामना बच्चों के लिए एक कदम हो सकता है।
Children’s Day संदेशों की शक्ति: प्रेरणा और कार्रवाई
Children’s Day का संदेश केवल शब्द नहीं, बल्कि भावनाओं का पुल है जो वयस्कों और बच्चों को जोड़ता है। नेहरू जी का प्रसिद्ध उद्धरण – “बच्चों को उड़ान भरने दो, लेकिन उनके पंखों को न काटो” – आज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अन्य नेताओं के संदेश भी उतने ही प्रेरणादायक हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “बच्चे राष्ट्र के भविष्य के बीज हैं। उन्हें पोषित करना हमारा कर्तव्य है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “Children’s Day हमें सिखाता है कि मासूमियत और जिज्ञासा ही प्रगति की कुंजी है।”
स्कूलों और समुदायों में Children’s Day के संदेशों का आदान-प्रदान एक उत्सव बन जाता है। उदाहरण के लिए, एक साधारण संदेश जैसे “प्रिय बच्चे, तुम्हारी मुस्कान ही दुनिया बदल सकती है। Happy Children’s Day!” न केवल खुशी बांटता है, बल्कि जागरूकता भी फैलाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संदेश बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और वयस्कों को उनके अधिकारों की याद दिलाते हैं। रवींद्रनाथ टैगोर का कथन, “हर बच्चा एक नया विश्व लाता है,” हमें सोचने पर विवश करता है कि हमारा संदेश कितना प्रभावी हो सकता है।
इस वर्ष, UNICEF की “Go Blue” कैंपेन के तहत ऐतिहासिक स्थलों को नीला रंगा गया, जो बच्चों के अधिकारों का प्रतीक है। यह कैंपेन दिखाती है कि संदेश दृश्यों से जुड़कर कितना शक्तिशाली बन सकता है। ब्रांड्स भी Children’s Day पर सक्रिय होते हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अभियानों के माध्यम से। लेकिन सच्ची शक्ति व्यक्तिगत संदेशों में है – माता-पिता से शिक्षकों तक, हर कोई एक कहानी बुन सकता है।
चुनौतियां और समाधान: संदेशों से आगे का सफर
हालांकि Children’s Day का उत्साह प्रेरणादायक है, लेकिन वास्तविकता कठोर है। भारत में बाल श्रम, कुपोषण और शिक्षा की कमी जैसे मुद्दे बरकरार हैं। मंत्रालय ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) की रिपोर्ट “Children in India 2025” के अनुसार, अपराधों में बच्चों का शिकार होना चिंताजनक है। ऐसे में, संदेश केवल शुभकामनाएं न रहें, बल्कि नीतिगत बदलाव की मांग करें। उदाहरणस्वरूप, “हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार – Children’s Day पर वादा करें!” जैसे संदेश सामाजिक आंदोलन चला सकते हैं।
सरकार की योजनाएं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और पोषण अभियान इन संदेशों को अमल में ला रही हैं। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर, हमें नेल्सन मंडेला के शब्दों को याद रखना चाहिए: “शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं।” Children’s Day हमें यही सिखाता है – संदेश से कार्रवाई तक का सफर।
नमूना Children’s Day संदेश: प्रेरणा के लिए
यहां कुछ मूल और प्रेरणादायक संदेश दिए जा रहे हैं, जो आप अपने प्रियजनों के साथ साझा कर सकते हैं:
- “Children’s Day मुबारक! तुम्हारी आंखों में छिपे सपने ही भारत का भविष्य हैं। उड़ान भरो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
- “प्रिय बच्चे, आज का दिन तुम्हारे लिए है। याद रखो, हर अधिकार तुम्हारा है। Happy Children’s Day!”
- “नेहरू जी की तरह, हम वादा करते हैं – तुम्हें मजबूत, शिक्षित और खुशहाल बनाएंगे। Children’s Day की शुभकामनाएं!”
ये संदेश न केवल भावुक हैं, बल्कि कार्य-उन्मुख भी। इन्हें व्हाट्सएप, सोशल मीडिया पर शेयर करके आप लाखों को प्रेरित कर सकते हैं।
उत्सव की झलक: स्कूलों से सड़कों तक
देशभर में Children’s Day पर स्कूलों में नाटक, चित्रकला प्रतियोगिताएं और नेहरू जी पर आधारित व्याख्यान आयोजित होते हैं। दिल्ली के इंडिया गेट से लेकर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया तक, नीले रंग की लहरें दिखाई देती हैं। यह उत्सव बच्चों को केंद्र में रखता है, जहां वे अपनी आवाज उठा सकते हैं। 2025 में, थीम के अनुरूप, कई एनजीओ वर्कशॉप आयोजित कर रहे हैं, जहां बच्चे अपने अधिकारों पर चर्चा करते हैं।
अंत में, Children’s Day का संदेश हमें एकजुट करता है। यह एक सकारात्मक भावना का त्योहार है, जो आशा जगाता है। आइए, इस दिन हम संकल्प लें कि हर बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बने। नेहरू जी की तरह, हम भी कहें – बच्चे ही राष्ट्र की आत्मा हैं।
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FAQ
Q1: भारत में Children’s Day कब मनाया जाता है?
A: 14 नवंबर को, जवाहरलाल नेहरू की जन्म जयंती पर।
Q2: 2025 का Children’s Day थीम क्या है?
A: “For Every Child, Every Right”, जो बाल अधिकारों पर केंद्रित है।
Q3: UNICEF के अनुसार भारत में कितने बच्चे हैं?
A: लगभग 43.66 करोड़ 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे।
Q4: Children’s Day संदेश क्यों महत्वपूर्ण हैं?
A: ये प्रेरणा देते हैं, जागरूकता फैलाते हैं और कार्रवाई को प्रोत्साहित करते हैं।
Q5: वैश्विक World Children’s Day कब है?
A: 20 नवंबर को, संयुक्त राष्ट्र द्वारा।




















